2025 में नेचुरल लुक का ट्रेंड, राइनोप्लास्टी से फेसलिफ्ट तक ये 3 प्लास्टिक सर्जरी रहीं टॉप पर!

साल 2025 में प्लास्टिक सर्जरी का ट्रेंड “ओवरडन” लुक से हटकर पूरी तरह नेचुरल और सटल एन्हांसमेंट की ओर शिफ्ट…

शिवहर सदर अस्पताल में सी-आर्म मशीन स्थापित, हड्डी उपचार अब जिले में ही संभव!

शिवहर सदर अस्पताल में हड्डी से जुड़े रोगियों के लिए एक बड़ी राहत मिली है। अस्पताल में आधुनिक कंप्यूटरीकृत सी-आर्म…

हरियाणा में 17 नए डे-केयर कैंसर सेंटर शुरू, मरीजों को घर के पास इलाज की सुविधा!

हरियाणा सरकार ने राज्य के कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने…

पतंजलि शहद की शुद्धता पर इंटरनेशनल मुहर, Elsevier जर्नल में शोध प्रकाशित!

पतंजलि के शहद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शुद्धता और गुणवत्ता का प्रमाण पेश कर दिया है। हाल ही में…

हरदोई मेडिकल कॉलेज में HMIS सिस्टम लागू, अब मरीजों को ऑनलाइन बेड और ई-डिस्चार्ज की सुविधा मिलेगी!

हरदोई मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (HMIS) लागू कर दिया…

हल्दी का नाम सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में पीले रंग की वही पारंपरिक हल्दी आती है, जिसका इस्तेमाल सदियों से रसोई और आयुर्वेद में होता रहा है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत की धरती पर एक बेहद दुर्लभ और खास किस्म की हल्दी भी पाई जाती है, जिसे ‘नीली हल्दी’ या ‘ब्लू गोल्ड’ कहा जाता है। इसका रंग गहरा नीला या नीला-बैंगनी होता है और यह सामान्य हल्दी से बिल्कुल अलग गुणों से भरपूर मानी जाती है। नीली हल्दी मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत और कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करने में मदद करते हैं। माना जाता है कि यह त्वचा संबंधी समस्याओं, घाव भरने और जोड़ों के दर्द में भी लाभकारी हो सकती है। इसके अलावा नीली हल्दी को मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी बताया जाता है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह तनाव कम करने और दिमाग को शांत रखने में सहायक हो सकती है। इसकी दुर्लभता और औषधीय गुणों के कारण ही इसे ‘ब्लू गोल्ड’ कहा जाता है। हालांकि, यह आम बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होती और इसका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना चाहिए। कुल मिलाकर, नीली हल्दी न सिर्फ रंग में अनोखी है बल्कि अपने गुणों के कारण भी खास मानी जाती है। पीली हल्दी के बाद अब यह दुर्लभ नीली हल्दी भी लोगों के बीच धीरे-धीरे पहचान बना रही है, जो भारत की समृद्ध जड़ी-बूटी परंपरा का एक और अनमोल उदाहरण है।

हल्दी का नाम सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में पीले रंग की वही पारंपरिक हल्दी आती है, जिसका इस्तेमाल…

च्यवनप्राश: हर भारतीय की सेहत का भरोसेमंद साथी, रोगों से बचाव और ऊर्जा बढ़ाने का आयुर्वेदिक सूत्र!

च्यवनप्राश सदियों से भारतीय जीवनशैली और आयुर्वेदिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सप्लीमेंट है,…

पतंजलि स्थापना दिवस पर स्वामी रामदेव का आह्वान— स्वदेशी अपनाएगा भारत तभी बनेगा आत्मनिर्भर!

पतंजलि योगपीठ के 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने आधुनिक जीवनशैली से उपज रही स्वास्थ्य…

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