पतंजलि योगपीठ के 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने आधुनिक जीवनशैली से उपज रही स्वास्थ्य समस्याओं पर गंभीर चिंता जताते हुए योग, आयुर्वेद, सनातन परंपरा और स्वदेशी को अपनाने का व्यापक आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी और भोगवादी जीवनशैली ने लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर किया है, ऐसे में योग और आयुर्वेद ही स्वस्थ जीवन का स्थायी समाधान हैं।
स्वामी रामदेव ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा—तीनों को संतुलित करती है। यदि व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में योग और प्राणायाम को शामिल कर ले, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने स्वदेशी आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय की जिम्मेदारी है। यदि देश का प्रत्येक नागरिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाता है, तो इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
स्वामी रामदेव ने कहा कि स्वदेशी अपनाने से स्थानीय उद्योगों, किसानों और उद्यमियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और भारत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हम विदेशी निर्भरता को कम कर, अपने संसाधनों और परंपराओं पर भरोसा करेंगे।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। स्वामी रामदेव के अनुसार, एक स्वस्थ शरीर, मजबूत आत्मबल और स्वदेशी सोच ही एक सशक्त, समृद्ध और वैश्विक नेतृत्व करने वाले भारत की नींव रख सकते हैं।
पतंजलि स्थापना दिवस के मंच से दिया गया यह संदेश न केवल स्वास्थ्य से जुड़ा है, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का आह्वान भी है।
