प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दौरान देशभर के छात्रों से संवाद करते हुए न सिर्फ परीक्षा और करियर से जुड़े अहम मुद्दों पर बात की, बल्कि अपनी उम्र को लेकर दिए गए बयान से भी सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, “मैं बीते हुए सालों को नहीं गिनता, जो बचे हैं उन्हें गिनता हूं… 25 साल अभी बाकी हैं।” पीएम के इस बयान को सकारात्मक सोच, ऊर्जा और जीवन के प्रति आशावादी नजरिए से जोड़कर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने छात्रों को परीक्षा के तनाव से न घबराने, खुद पर विश्वास रखने और जीवन को केवल अंकों तक सीमित न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मार्क्स जरूरी हैं, लेकिन स्किल्स उससे भी ज्यादा अहम हैं, क्योंकि स्किल ही जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट और तकनीक के सही उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया ज्ञान बढ़ाने का माध्यम बने, न कि ध्यान भटकाने का कारण।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को ‘एग्जाम वॉरियर’ बनने के लिए प्रेरित किया और कहा कि असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपेक्षा जताई कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानें और निखारने में मदद करें।
कुल मिलाकर, ‘परीक्षा पे चर्चा’ के इस संस्करण में पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट था— उम्र, परीक्षा या परिस्थितियां कभी भी आगे बढ़ने में बाधा नहीं बननी चाहिए, अगर सोच सकारात्मक और लक्ष्य स्पष्ट हो।
