उज्जैन स्थित भगवान महाकाल के दरबार में होली की शुरुआत पूरी दुनिया से पहले मानी जाती है। Mahakal Holi 2026 के अवसर पर 3 मार्च को विशेष होलिका दहन, दिव्य भस्म आरती और पारंपरिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। यह परंपरा सदियों पुरानी है और धार्मिक मान्यता के अनुसार, सबसे पहले राजा महाकाल को ही होली अर्पित की जाती है, उसके बाद ही आम जन होली उत्सव की शुरुआत करते हैं।
महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती का विशेष महत्व है। फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास यह आरती और भी दिव्य स्वरूप धारण कर लेती है, जब भगवान महाकाल को गुलाल और रंग अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि यहां की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
होलिका दहन की अग्नि को पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु इसे अपने जीवन की नकारात्मकता और कष्टों के अंत का प्रतीक समझते हैं। उज्जैन में यह आयोजन अत्यंत अनुशासित और वैदिक विधि-विधान से संपन्न होता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
महाकाल की होली का रहस्य इसी आध्यात्मिक परंपरा में छिपा है—जहां उत्सव से पहले भगवान को समर्पण और आशीर्वाद की कामना की जाती है। यही कारण है कि उज्जैन की यह होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सनातन आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम मानी जाती है।
