उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करने के लक्ष्य के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति को और धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन 23 सीटों पर विशेष फोकस किया है, जहां उसे पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। इन्हीं सीटों को जीतकर भाजपा “हैटट्रिक” लगाने की योजना पर काम कर रही है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि इन हारी हुई सीटों पर पकड़ मजबूत कर ली जाए, तो सत्ता में वापसी का रास्ता काफी आसान हो जाएगा। इसके लिए भाजपा ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का फैसला लिया है। प्रत्येक बूथ को सक्रिय बनाने, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस रणनीति के तहत हर बूथ पर BLA-2 (बूथ लेवल एजेंट-2) की नियुक्ति की जा रही है, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके और मतदाताओं से सीधा संपर्क बना रहे। साथ ही, वरिष्ठ नेताओं के प्रवास कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं, जिसके तहत वे लगातार विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे।
भाजपा ने पिछले चुनावों के नतीजों का गहन विश्लेषण भी किया है। किन सीटों पर क्यों हार हुई, किन सामाजिक वर्गों में समर्थन कमजोर पड़ा और किन मुद्दों का असर पड़ा—इन सभी पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर नई चुनावी रणनीति बनाई जा रही है, ताकि पुरानी गलतियों को दोहराया न जाए।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों पर भी सख्ती दिखाई है। पार्टी हाईकमान ने साफ संकेत दिए हैं कि फिलहाल संगठन और सरकार में स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता है, ताकि चुनावी तैयारियों पर पूरा ध्यान दिया जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति बताती है कि पार्टी उत्तराखंड में सत्ता को लेकर पूरी तरह गंभीर है। संगठनात्मक मजबूती, बूथ मैनेजमेंट और नेतृत्व की सक्रियता के जरिए पार्टी मतदाताओं का भरोसा फिर से जीतने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में भाजपा ने तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। 23 हारी हुई सीटों पर केंद्रित यह विशेष रणनीति आने वाले चुनावों में पार्टी की सफलता या असफलता तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
