दिल्ली हाई कोर्ट ने तुर्कमान गेट पत्थरबाजी मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि हिंसा स्थल पर केवल मौजूद होने या भीड़ का हिस्सा होने भर से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया जा सकता। गिरफ्तारी के लिए आरोपी की विशिष्ट और सक्रिय भूमिका को साबित करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि वह किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले ठोस सबूत, विशेष रूप से वीडियो फुटेज, अदालत के सामने पेश करे। न्यायालय ने कहा कि अगर वीडियो में यह स्पष्ट रूप से दिखता है कि संबंधित व्यक्ति हिंसा के लिए उकसा रहा है, पत्थरबाजी में शामिल है या सक्रिय भूमिका निभा रहा है, तभी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई उचित मानी जाएगी।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर निर्दोष लोगों की स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए। इसी क्रम में अदालत ने पुलिस से मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) भी मांगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अब तक की गई गिरफ्तारियां किस आधार पर की गई हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट की यह टिप्पणी नागरिक अधिकारों और निष्पक्ष जांच की दिशा में बेहद अहम है। यह फैसला यह संदेश देता है कि कानून का पालन करते हुए भी सबूत और व्यक्तिगत भूमिका के बिना किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
