बॉलीवुड में हिंसा और कंटेंट की दिशा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। Dhurandhar और Toxic जैसी फिल्मों को लेकर पहले ही कई वर्ग सवाल उठा चुके हैं और अब इस बहस में हीरामंडी वेब सीरीज के एक अभिनेता का नाम भी जुड़ गया है। एक हालिया इंटरव्यू में अभिनेता ने इन फिल्मों को अत्यधिक हिंसक बताते हुए न सिर्फ इनके कंटेंट पर, बल्कि फिल्ममेकर्स की सोच पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एक्टर का कहना है कि ऐसी फिल्में यह दावा करती हैं कि वे समाज का आईना हैं, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या समाज सिर्फ हिंसा, गुस्से और क्रूरता से ही बना है? उन्होंने पूछा कि क्या इन फिल्मों को परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है और क्या यह कंटेंट आज के युवाओं पर नकारात्मक असर नहीं डाल रहा। अभिनेता के मुताबिक, सिनेमा का असर गहरा होता है और मेकर्स को यह समझना चाहिए कि वे किस तरह की सोच और व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि रियलिज़्म के नाम पर हिंसा परोसना आसान है, लेकिन जिम्मेदार सिनेमा वही है जो सोचने पर मजबूर करे, न कि केवल चौंकाए। उनका मानना है कि फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाती हैं और इस जिम्मेदारी से भागा नहीं जा सकता।
हीरामंडी जैसे गंभीर और संवेदनशील प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे इस अभिनेता की टिप्पणी के बाद फिल्म इंडस्ट्री में कंटेंट की सीमाओं, रचनात्मक आज़ादी और सामाजिक प्रभाव को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि इस बयान पर फिल्ममेकर्स और अन्य कलाकारों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
