केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अगले शैक्षणिक सत्र से थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना और वैश्विक स्तर पर संवाद कौशल बढ़ाना है। नई नीति के तहत कक्षा 6 से अब सभी छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा सीखना अनिवार्य होगा।
इस कदम से छात्रों को न केवल मातृभाषा और राष्ट्रीय भाषाओं में प्रवीणता मिलेगी, बल्कि विदेशी भाषा सीखने से उनका वैश्विक दृष्टिकोण भी विकसित होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि विदेशी भाषा के विकल्प में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को शामिल किया जाएगा, जैसे कि फ्रेंच, स्पैनिश, जर्मन, जापानी, चीनी आदि, ताकि छात्र भविष्य में उच्च शिक्षा और करियर के अवसरों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।
शिक्षाविदों का कहना है कि यह नीति छात्रों में सांस्कृतिक समझ, संवाद कौशल और भाषा की लचीलापन बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही, यह नीति देश में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्कूलों को इसके लिए पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री में बदलाव करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
CBSE का मानना है कि नई थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी से छात्रों का मनोवैज्ञानिक और बौद्धिक विकास होगा, उन्हें भाषा संबंधी चुनौतियों का सामना करना सीखने का अवसर मिलेगा, और वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक आत्मविश्वास के साथ संवाद कर सकेंगे।
