नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी करार दिए जा चुके विकास यादव को एक बार फिर अदालत से झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी तीन सप्ताह की फर्लो (अस्थायी रिहाई) की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल महानिदेशक द्वारा उसकी रिहाई अर्जी को खारिज करने का फैसला न तो मनमाना था और न ही इससे किसी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता और दोषी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए फर्लो देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। इसलिए जेल प्रशासन का निर्णय पूरी तरह उचित है। कोर्ट ने यह भी माना कि पीड़ित परिवार और समाज के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2002 में नीतीश कटारा की हत्या विकास यादव और उसके साथी ने इसलिए कर दी थी क्योंकि नीतीश का विकास की बहन से प्रेम संबंध था। यह मामला देशभर में काफी चर्चित रहा था। इस हत्याकांड में विकास यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और वह फिलहाल जेल में बंद है।
