बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं गंभीर हालत वाले मरीजों को मजबूरी में दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) रेफर किया जा रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में कुल 30 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 15 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यानी आधे से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर मरीजों की जांच, इलाज और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां डॉक्टरों की कमी के कारण एक-एक मरीज को दिखाने में काफी समय लग जाता है।
केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भी भारी कमी है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। आईसीयू की समुचित सुविधा नहीं होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद डीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है। कई बार एंबुलेंस की व्यवस्था में भी देरी होती है, जिससे मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमंडलीय अस्पताल होने के बावजूद यहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। क्षेत्र की बड़ी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के कारण लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज काफी महंगा है। गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद परेशान करने वाली है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जल्द से जल्द डॉक्टरों की नियुक्ति, नर्सिंग स्टाफ की बहाली और आईसीयू समेत अन्य जरूरी सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो मरीजों की जान पर खतरा बना रहेगा और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठता चला जाएगा।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर कितनी जल्द ठोस कदम उठाता है और बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल को डॉक्टरों व सुविधाओं से सुसज्जित कर पाता है।
