उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मतदाता सूची को लेकर एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मतदाता सूची में कई ऐसे व्यक्तियों के नाम अब भी दर्ज पाए गए हैं, जिनकी मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है, जबकि सैकड़ों नए और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से गायब बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों की शिकायतों के बाद यह मामला उजागर हुआ। आरोप है कि जिन मतदाताओं ने हाल ही में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था, उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए, जबकि मृत व्यक्तियों के नाम बिना किसी सत्यापन के यथावत बने हुए हैं। इससे मतदाता सूची की शुद्धता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
सूत्रों के अनुसार, कई परिवारों ने बताया कि उनके परिजन जिनका देहांत काफी पहले हो चुका है, उनके नाम अभी भी वोटर लिस्ट में मौजूद हैं। वहीं, 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाता और हाल ही में स्थानांतरित होकर आए लोग मतदान सूची में अपना नाम नहीं ढूंढ पा रहे हैं। इससे आगामी चुनावों में मतदान प्रतिशत और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासन की बड़ी चूक बताते हुए चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मतदाता सूची को दुरुस्त नहीं किया गया, तो चुनाव परिणामों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
वहीं, प्रशासन की ओर से सफाई देते हुए संबंधित अधिकारियों ने कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान तकनीकी और मानवीय त्रुटियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दावा किया गया है कि सभी शिकायतों का जल्द निपटारा किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मृत मतदाताओं के नाम हटाने और छूटे हुए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से की जाएगी।
फिलहाल, गोरखपुर में मतदाता सूची की इस गड़बड़ी ने आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों की मांग है कि प्रशासन पारदर्शी तरीके से सूची को अपडेट करे, ताकि हर योग्य मतदाता को मतदान का अधिकार मिल सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे।
