नासा ने अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक अहम उपलब्धि 2001 में हासिल की, जब उसका नियर शुमेकर (NEAR Shoemaker) अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक इरोस (Eros) एस्टेरॉयड पर उतरा। यह दुनिया का पहला मानव-निर्मित अंतरिक्ष यान था, जिसने किसी एस्टेरॉयड की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की। यह मिशन भले ही केवल 17 दिनों तक चला, लेकिन इसके वैज्ञानिक परिणाम बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।
नियर शुमेकर मिशन का उद्देश्य एस्टेरॉयड इरोस की संरचना, सतह, गुरुत्वाकर्षण और रासायनिक तत्वों का अध्ययन करना था। 12 फरवरी 2001 को यान ने इरोस पर नियंत्रित तरीके से उतरकर इतिहास रच दिया। लैंडिंग के बाद यान ने उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और अहम वैज्ञानिक डेटा पृथ्वी पर भेजा, जिससे वैज्ञानिकों को छोटे खगोलीय पिंडों को समझने में बड़ी मदद मिली।
इस मिशन से यह स्पष्ट हुआ कि एस्टेरॉयड कैसे बने, वे सौरमंडल के विकास में क्या भूमिका निभाते हैं और पृथ्वी के लिए संभावित खतरे या अवसर क्या हो सकते हैं। साथ ही, नियर शुमेकर मिशन ने भविष्य के एस्टेरॉयड माइनिंग और डिफेंस मिशनों की नींव रखी। कम समय का यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित हुआ और आज भी इसे ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में याद किया जाता है।
