साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण देश में इसका कोई धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव नहीं माना जाएगा और न ही सूतक काल लागू होगा। श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि इस दिन मंदिरों के पट सामान्य रूप से खुले रहेंगे और पूजा-पाठ पर कोई रोक नहीं होगी।
जानकारी के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। खास तौर पर दक्षिण अफ्रीका में लोग इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे। भारत समेत एशिया के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण नजर नहीं आएगा।
भारतीय समय के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे से शुरू होकर शाम 7:57 बजे तक रहेगा। हालांकि, भारत में दृश्य न होने के कारण आम लोगों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, जब कोई ग्रहण किसी देश में दिखाई नहीं देता, तो वहां सूतक काल भी मान्य नहीं होता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय भोजन, पूजा और शुभ कार्यों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इस बार भारत में ऐसी कोई बाध्यता नहीं रहेगी। लोग अपने रोजमर्रा के काम और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से कर सकेंगे।
वहीं, खगोल विज्ञान के नजरिए से सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना होती है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। वैज्ञानिकों के लिए यह समय सूर्य के वातावरण और उसकी गतिविधियों का अध्ययन करने का खास अवसर होता है।
इसके अलावा, 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। उस दौरान सूतक काल मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा। इसलिए श्रद्धालुओं के लिए मार्च का ग्रहण अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई न देने के कारण आम लोगों के लिए ज्यादा चिंता का विषय नहीं है। न सूतक रहेगा, न पूजा-पाठ पर रोक होगी। यह ग्रहण मुख्य रूप से विदेशों में ही देखने को मिलेगा, जबकि भारत में जीवन सामान्य रूप से चलता रहेगा।
