बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत और अत्यधिक स्क्रीन टाइम को लेकर बिहार सरकार गंभीर हो गई है। राज्य सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक और ठोस नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया जब सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा ने विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और बच्चों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया।
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों की राय लेने का निर्णय लिया है। इसके तहत National Institute of Mental Health and Neurosciences (NIMHANS), बेंगलुरु से विस्तृत विशेषज्ञ रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधार पर प्रभावी नीति बनाई जा सके। रिपोर्ट में ऑनलाइन गेमिंग की लत, व्यवहार में बदलाव, पढ़ाई पर असर, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और सामाजिक दूरी जैसे पहलुओं का अध्ययन शामिल होगा।
सरकार की प्रस्तावित नीति में बच्चों के स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने, अभिभावकों के लिए जागरूकता अभियान चलाने, स्कूलों में परामर्श सत्र आयोजित करने और डिजिटल उपयोग के संतुलित तरीके को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल किए जा सकते हैं। साथ ही, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के नियमन और आयु-आधारित नियंत्रण तंत्र पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम समय की आवश्यकता माना जा रहा है।
यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह न केवल बच्चों को डिजिटल लत से बचाने में सहायक होगी, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
