बिहार में इथेनॉल संकट को लेकर सियासी और औद्योगिक हलकों में मची हलचल के बीच राज्य सरकार ने बड़ा बयान देते हुए स्थिति को नियंत्रण में बताया है। यह मुद्दा हाल ही में बिहार विधानसभा में उठाया गया, जहां इथेनॉल फैक्ट्रियों के संभावित बंद होने को लेकर चिंता जताई गई।
जदयू विधायक श्याम रजक ने सदन में कहा कि सीमित कोटे के कारण कई इथेनॉल फैक्ट्रियों पर ताला लगने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस गंभीर समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
इस पर उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य की कोई भी इथेनॉल फैक्ट्री बंद नहीं होगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के साथ 35.28 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीद को लेकर एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) साइन किया गया है, जिससे फैक्ट्रियों को पर्याप्त ऑर्डर मिलते रहेंगे और उत्पादन जारी रहेगा।
वहीं, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि वे जल्द ही दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से मुलाकात करेंगे और बिहार का इथेनॉल कोटा बढ़ाने की मांग रखेंगे। उनका कहना है कि राज्य में इथेनॉल उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और इसके लिए अधिक समर्थन और संसाधनों की जरूरत है।
सरकार ने यह भी साफ किया कि इथेनॉल फैक्ट्रियों से जुड़े हजारों कर्मचारियों और किसानों के हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। रोजगार सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे और किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक खबरों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है, बल्कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के जरिए पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस उद्योग को कमजोर पड़ने नहीं दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इथेनॉल संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। एमओयू, केंद्र से बातचीत और नीतिगत सुधारों के जरिए फैक्ट्रियों को राहत दी जाएगी और राज्य में उद्योग तथा रोजगार दोनों को सुरक्षित रखा जाएगा।
