वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब उनसे बार-बार ‘हिंदू होने का प्रमाण’ मांगा गया, तो अब वह मुख्यमंत्री योगी से ही हिंदू होने का प्रमाण मांगते हैं। उनके इस बयान के बाद सियासी और धार्मिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में हिंदू हितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देना चाहिए और देश से मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने इन मांगों को हिंदू समाज की आस्था और परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि केवल भाषण देने से नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने से ही हिंदू होने का प्रमाण मिलता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को 40 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर इस अवधि में उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वह सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री को ‘नकली हिंदू’ घोषित करेंगे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान न सिर्फ धार्मिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और आस्था की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।
इस बयान के बाद समर्थकों और विरोधियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोग इसे हिंदू हितों की आवाज बता रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे अनावश्यक विवाद और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करार दे रहे हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या राज्य सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
काशी जैसी धार्मिक नगरी से दिए गए इस बयान ने एक बार फिर धर्म, राजनीति और सत्ता के रिश्ते को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी माहौल और गर्म होने की संभावना जताई जा रही है।
