समाजवादी पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने की दिशा में एक नया कदम उठाते हुए ‘पीडीए पंचांग’ जारी किया है। इस पंचांग में पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े महापुरुषों, समाज सुधारकों और नेताओं की जयंती व महत्वपूर्ण तिथियों को शामिल किया गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे सामाजिक न्याय और पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) एकता का प्रतीक बताया। पार्टी का उद्देश्य इन वर्गों के बीच राजनीतिक चेतना को मजबूत करना और उन्हें एक साझा मंच पर लाकर आगामी चुनावों में समर्थन हासिल करना है। हालांकि, इस पहल को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे ‘सनातन विरोधी’ व ‘पाकिस्तानी कैलेंडर’ तक कह दिया है। सपा की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पंचांग में कुछ अगड़ी जातियों के महापुरुषों को भी शामिल किया गया है, ताकि सामाजिक समरसता का संदेश दिया जा सके। कुल मिलाकर, ‘पीडीए पंचांग’ को सपा की चुनावी रणनीति और सामाजिक राजनीति के एक अहम हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
