बिहार में 2024 में अपहरण के मामलों को लेकर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधान परिषद में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पूरे साल राज्य में कुल 19,768 अपहरण के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 14,000 से अधिक मामले “शादी की नीयत” से युवाओं को भगाने के थे, जबकि केवल 158 मामले फिरौती व हत्या जैसे गंभीर इरादों से संबंधित थे।
गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 24 घंटे के भीतर गुमशुदा नहीं मिलता है, तो पुलिस तुरंत अपहरण का मामला दर्ज करती है। यही कारण है कि अपहरण के आंकड़े भले ही बहुत बड़े दिखते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश मामले शादी या व्यक्तिगत कारणों से जुड़े होते हैं, न कि किसी हिंसक अपराध से।
सम्राट चौधरी ने विधान परिषद में यह जानकारी अब्दुल बारी सिद्दीकी के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस और प्रशासन ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करते हैं और ज्यादातर मामलों को शीघ्र ही सुलझा लिया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अपहरण के इस तरह के आंकड़े समाज में बदलती परंपराओं और युवाओं के विवाह संबंधी विवादों को भी दर्शाते हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि बिहार में अधिकतर अपहरण मामले हिंसक नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक विवादों से उत्पन्न होते हैं। इसके बावजूद, प्रशासन की सतर्कता और कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस खुलासे से यह भी समझ आता है कि अपहरण की बड़ी संख्या केवल कानून प्रवर्तन के नजरिए से दर्ज होती है और इसमें वास्तविक गंभीर अपराध का प्रतिशत काफी कम है। इससे न सिर्फ जनता को सही जानकारी मिलती है, बल्कि समाज में इस विषय पर भ्रम और डर को भी कम किया जा सकता है।
