उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बुंदेलखंड के महोबा जिले से सामने आया है, जहां चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोककर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक ने जल जीवन मिशन के तहत चल रहे अधूरे और धीमे कार्यों को लेकर नाराजगी जताई और मौके पर ही अधिकारियों पर सवाल खड़े किए।
इस घटना ने पार्टी के भीतर अनुशासन और समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। एक ओर सरकार विकास योजनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के विधायक ही सार्वजनिक रूप से मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आ रहे हैं। काफिला रोके जाने की घटना के बाद पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया है और विधायक बृजभूषण राजपूत से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
यह विवाद केवल बुंदेलखंड तक सीमित नहीं है। कानपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी भाजपा नेताओं के बीच आपसी मतभेद और सार्वजनिक बयानबाजी की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव है तो कहीं स्थानीय मुद्दों को लेकर नेता एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों से भाजपा की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष इसे सरकार की विफलता और पार्टी में बढ़ती गुटबाजी का उदाहरण बता रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व के लिए आगामी चुनावों से पहले अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
