केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के दिन उनके पहनावे को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे महिलाओं के प्रति लैंगिक भेदभाव और पूर्वाग्रह का उदाहरण बताया। सीतारमण ने कहा कि जब कोई महिला बड़े पद पर होती है, तो उसके काम और फैसलों के बजाय उसके कपड़ों पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
वित्त मंत्री ने कहा, “मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि बजट के दिन आप क्या पहनेंगी, जबकि पुरुष मंत्रियों से उनके कपड़ों को लेकर शायद ही कभी सवाल किया जाता है।” उनके मुताबिक, इस तरह की सोच महिलाओं की क्षमताओं, नेतृत्व और पेशेवर योगदान को नजरअंदाज करती है और उन्हें सतही नजरिए से आंकती है।
निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि वह ऐसी टिप्पणियों को चुपचाप स्वीकार करने के बजाय चुनौती देना चाहती हैं। उनका मानना है कि समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं की पहचान उनके पहनावे से नहीं, बल्कि उनके काम, निर्णय और जिम्मेदारियों से होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को बार-बार इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ता है, जो एक गहरी जड़ें जमाए सोच को दर्शाता है। सीतारमण के अनुसार, अगर महिलाओं को समानता देनी है तो नजरिया बदलना होगा और उनके पेशेवर योगदान पर ध्यान देना होगा।
वित्त मंत्री का यह बयान न सिर्फ राजनीति में महिलाओं की भूमिका पर बहस को तेज करता है, बल्कि समाज में मौजूद लैंगिक असमानता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
