पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी बहुचर्चित और अभी तक अप्रकाशित किताब को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। हाल के दिनों में उनकी किताब के प्रकाशन को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब उन्होंने विराम लगा दिया है।
जनरल नरवणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए साफ किया कि उनकी किताब की मौजूदा स्थिति वही है, जो प्रकाशक पेंगुइन इंडिया ने अपने हालिया आधिकारिक बयान में बताई है। उन्होंने पेंगुइन के बयान का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी तरह का बदलाव या नया घटनाक्रम नहीं हुआ है।
उनके इस बयान को किताब को लेकर चल रही चर्चाओं और संभावित विवादों पर एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, पूर्व आर्मी चीफ की किताब को लेकर यह माना जा रहा था कि उसमें उनके कार्यकाल से जुड़े अहम सैन्य और रणनीतिक अनुभव शामिल हैं, जिस वजह से इसके प्रकाशन पर लोगों की खास नजर बनी हुई थी।
नरवणे के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल किताब का प्रकाशन उसी प्रक्रिया और स्थिति में है, जैसा प्रकाशक ने बताया है। इससे न केवल अफवाहों पर रोक लगी है, बल्कि यह भी संकेत मिला है कि इस मुद्दे पर आगे कोई नई जानकारी आने तक स्थिति यथावत रहेगी।
