सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस समय सख्त टिप्पणी देखने को मिली, जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायिक सुधारों की मांग से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाएं अक्सर प्रचार और कैमरों के सामने आने के उद्देश्य से दाखिल की जाती हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पब्लिसिटी के लिए ये सब मत करिए” और ऐसे मामलों में सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर नाराजगी जताई।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि किसी को न्यायिक व्यवस्था में सुधार से जुड़े सुझाव देने हैं, तो उसके लिए उपयुक्त मंच और प्रक्रिया मौजूद है। ऐसे सुझाव पत्र या औपचारिक माध्यम से संबंधित प्राधिकरणों तक भेजे जा सकते हैं, न कि जनहित याचिका के रूप में अदालत में लाकर। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतें गंभीर और वास्तविक विवादों के निपटारे के लिए हैं, न कि ऐसे मामलों के लिए जिनका उद्देश्य केवल सुर्खियां बटोरना हो। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायिक मंच का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
