गाजियाबाद की कई आवासीय सोसायटियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) घोटाले का मामला सामने आया है, जहां निर्धारित मानकों का उल्लंघन कर निर्धारित क्षमता से कम क्षमता वाले STP लगाए गए हैं। अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) का आरोप है कि बिल्डरों ने नियमों को दरकिनार करते हुए लागत बचाने के लिए कम क्षमता के प्लांट लगाए, जिसके कारण सोसायटियों में उत्पन्न हो रहे सीवेज का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है।
शिकायतों के अनुसार, कई सोसायटियों में STP या तो पूरी क्षमता पर काम नहीं कर रहे हैं या फिर वहां के निवासियों की संख्या के अनुरूप लगाए ही नहीं गए। इसके चलते बिना उपचारित या आंशिक रूप से उपचारित गंदा पानी आसपास के नालों, जलस्रोतों और खुले क्षेत्रों में छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण, दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं।
गौर कैस्केड्स और आदित्य वर्ल्ड सिटी जैसी बड़ी सोसायटियों में STP की क्षमता को लेकर गंभीर शिकायतें उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) में दर्ज कराई गई हैं। AOA का कहना है कि बिल्डरों ने निर्माण के समय जो क्षमता कागजों में दिखाई थी, वह वास्तविक स्थिति से काफी कम है, जो स्पष्ट रूप से पर्यावरणीय नियमों और भवन मानकों का उल्लंघन है।
निवासियों का आरोप है कि STP की खराब कार्यप्रणाली के कारण सोसायटियों में बदबू, मच्छरों की समस्या और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, गंदे पानी का गलत निस्तारण आसपास के इलाकों में भी प्रदूषण फैला रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित बिल्डरों और प्रबंधन पर जुर्माना, सुधारात्मक कार्रवाई और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। यह मामला न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे एनसीआर में आवासीय परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
