उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। देहरादून में डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसका उद्देश्य मामले में कथित वीआईपी की पहचान उजागर करना है। डॉ. जोशी एक प्रतिष्ठित पर्यावरणविद हैं और उन्होंने इस घटना को लेकर कानून और न्याय की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है।
इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री और अंकिता के माता-पिता दोनों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहन तरीके से हो, ताकि किसी भी प्रकार का दबाव या राजनीतिक प्रभाव मामले की निष्पक्षता में बाधा न बने।
डॉ. अनिल प्रकाश की शिकायत में यह बात सामने आई कि अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” देने के लिए दबाव बनाया गया था, और यह दबाव सीधे या indirecly किसी प्रभावशाली व्यक्ति (वीआईपी) से जुड़ा था। इस मामले में अब सीबीआई जांच के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि वीआईपी कौन था और हत्याकांड में उसकी भूमिका क्या थी।
इस कदम को न्याय सुनिश्चित करने और पीड़िता के परिवार को सच्चाई तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। देशभर में इस घटना के प्रति लोगों की संवेदनशीलता और न्याय की मांग को देखते हुए अब सबकी नजरें सीबीआई जांच के परिणामों पर टिकी हैं।
