वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल के दाम 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं। वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाओं और भू-राजनीतिक तनावों को इस उछाल का मुख्य कारण माना जा रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में आ रही अड़चनों की वजह से बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) दोनों के दामों में लगातार तेजी बनी हुई है।https://youtube.com/@satyabharattimes?si=BnGxgJiMLOGWkKot
भारत पर क्या पड़ेगा इसका असर?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जाती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव भारत के आयात बिल (Import Bill) और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
क्या महंगे होंगे पेट्रोल और डीजल?
कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से देश की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का मार्जिन प्रभावित होगा। यदि वैश्विक बाजार में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो आगामी दिनों में देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी समीक्षा देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, माल ढुलाई महंगी होने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।https://youtube.com/@satyabharattimes?si=BnGxgJiMLOGWkKot










