उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम (नीम करोली बाबा आश्रम) में बढ़ती महंगाई और ओवरचार्जिंग को लेकर हुए प्रशासनिक सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पढ़ें पूरी खबर।https://youtube.com/@satyabharattimes?si=8ZjhqjeY_x1zN5Cn

कैंची धाम में पर्यटकों पर महंगाई की मार, सर्वे में सामने आए कई चौंकाने वाले फैक्ट्स
गरमपानी / नैनीताल (सत्य भारत टाइम्स): उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र और बाबा नीम करोली महाराज के निवास स्थल कैंची धाम दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी महंगाई और ओवरचार्जिंग का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार के निर्देशों पर अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा कराए गए सामाजिक-आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई है।https://youtube.com/@satyabharattimes?si=8ZjhqjeY_x1zN5Cn
ऑफ-सीजन में भी मुनाफा, लेकिन पर्यटक बेहाल
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, कैंची धाम और भवाली क्षेत्र के होटल तथा होम-स्टे ऑफ-सीजन में भी काफी मुनाफे में चल रहे हैं। हालांकि, यहां आने वाले पर्यटकों ने खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, होटल किरायों और परिवहन सुविधाओं के अत्यधिक मूल्यों को लेकर अपनी नाराजगी और चिंता जताई है।
सर्वे की मुख्य बातें और आंकड़े:
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कमरों का किराया: क्षेत्र के होटलों में एक रात का किराया 2,000 रुपये से 7,000 रुपये तक और होम-स्टे में 1,000 से 3,000 रुपये तक वसूला जा रहा है।
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वेतन स्थिति: होम-स्टे के कर्मचारियों को औसतन 10,000 से 15,000 रुपये और होटल कर्मचारियों को 15,000 से 20,000 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता है।
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शटल सेवा से नुकसान: local व्यवसायियों और होटल संचालकों का कहना है कि शटल सेवा के चलते अधिकांश यात्री दिन में दर्शन करके लौट जाते हैं और रात्रि विश्राम नहीं करते, जिससे उनके कारोबार पर असर पड़ रहा है।https://youtube.com/@satyabharattimes?si=8ZjhqjeY_x1zN5Cn
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पार्किंग व यातायात की समस्या: सर्वे में पर्याप्त पार्किंग स्थान न होना सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है।
सख्त नियम और रेट लिस्ट लागू करने की मांग
धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही इस ओवरचार्जिंग को देखते हुए श्रद्धालुओं ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि भोजन, परिवहन और ठहरने के लिए एक निश्चित पारदर्शी दर सूची (Fix Rate List) लागू की जाए, ताकि बाबा के दर्शन करने आ रहे देश-विदेश के भक्तों को किसी प्रकार की आर्थिक असुविधा न हो।
मुख्य सांख्यिकी अधिकारी द्वारा यह सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है, जिसके बाद सरकार जल्द ही व्यवस्था में सुधार के लिए नए कदम उठा सकती है।










