छात्रों की मजबूरी पीजी में रहना, दिल्ली में सालाना करीब ₹5,000 करोड़ का हुआ पीजी बाजार

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Delhi PG Market: दिल्ली में ₹5,000 करोड़ का हुआ पीजी बाजार, हॉस्टल की कमी बनी छात्रों की मजबूरी | Satya Bharat Times

देशभर से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल की किल्लत के चलते पेइंग गेस्ट (PG) उद्योग तेजी से बढ़ा है। जानिए कैसे दिल्ली में पीजी का बाजार सालाना ₹5,000 करोड़ के आंकड़े को छू चुका है।

नई दिल्ली (सत्य भारत टाइम्स):

देश की राजधानी दिल्ली उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के लिए देशभर के युवाओं की पहली पसंद मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), जामिया मिलिया इस्लामिया सहित विभिन्न प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने के लिए दिल्ली का रुख करते हैं। लेकिन दिल्ली पहुँचते ही इन छात्रों को जिस सबसे पहली और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है, वह है—रहने के लिए सुरक्षित और किफायती जगह की तलाश।

हॉस्टल सीटों का संकट और छात्रों की निर्भरता

दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालयों और राजकीय शैक्षणिक संस्थानों में हॉस्टल सीटों की भारी कमी है। कुल नामांकित छात्रों की तुलना में विश्वविद्यालय हॉस्टलों में महज 10 से 15 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही स्थान मिल पाता है। इस बड़े अंतर के कारण बाहर से आने वाले छात्रों के पास निजी पेइंग गेस्ट (PG) या फ्लैट किराए पर लेकर रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता।  https://youtube.com/@satyabharattimes?si=sgmuFrbZn87Lhwj3

सालाना ₹5,000 करोड़ का विशाल उद्योग

छात्रों की इसी मजबूरी ने दिल्ली में पीजी सेक्टर को एक विशाल व्यावसायिक उद्योग का रूप दे दिया है। नवीनतम बाजार विश्लेषण और रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) का कारोबार सालाना लगभग ₹5,000 करोड़ के आंकड़े तक पहुँच चुका है।

नॉर्थ कैम्पस (विजय नगर, हडसन लाइन, कमला नगर), साउथ कैम्पस (सत्य निकेतन, आनंद निकेतन), मुखर्जी नगर, करोल बाग, लक्ष्मी नगर और कालू सराय जैसे प्रमुख छात्र हब में हजारों की संख्या में पीजी संचालित हो रहे हैं। इन इलाकों में एक बेड का औसत मासिक किराया ₹8,000 से लेकर ₹25,000 तक पहुँच गया है।

मनमाना किराया और सुविधाओं की अनदेखी

पीजी कारोबार के इस अनियंत्रित विस्तार के साथ ही कई गंभीर समस्याएँ भी उभरकर सामने आई हैं:

  • अनियंत्रित किराया वृद्धि: अकादमिक सत्र (Admission Season) शुरू होते ही पीजी संचालक किराए में अचानक अत्यधिक वृद्धि कर देते हैं।

  • सुरक्षा और बुनियादी ढांचा: कई आवासीय भवनों में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety), आपातकालीन निकास और स्ट्रक्चरल मजबूती के मानकों की अनदेखी की जाती है।

  • अतिरिक्त शुल्क: बिजली बिल, सिक्योरिटी डिपॉजिट और मेंटेनेंस के नाम पर छात्रों से मनमाने पैसे वसूले जाते हैं।

कड़े नियमन और रेगुलेशन की मांग

हाल ही में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में पीजी से जुड़ी घटनाओं और सुरक्षा ऑडिट के आदेशों के बाद, छात्रों और अभिभावकों ने सरकार से इस क्षेत्र के लिए सख्त नियम बनाने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दिल्ली में स्टूडेंट हाउसिंग (Student Housing Policy) के लिए एक पारदर्शी किराया नियंत्रण और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया लागू नहीं की जाएगी, तब तक छात्रों को इस आर्थिक और मानसिक दबाव से राहत मिलना कठिन है।  https://youtube.com/@satyabharattimes?si=sgmuFrbZn87Lhwj3

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Author: Satya Bharat

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