ग्रेटर नोएडा और नोएडा में पानी की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। हाल ही की जांच में यह सामने आया है कि कई क्षेत्रों में पानी का TDS स्तर 1500 से 2000 के पार जा चुका है, जो कि सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। इस दूषित पानी के कारण हजारों लोग बीमार पड़ चुके हैं, और स्थानीय अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
स्थानीय प्राधिकरण के दावों के बावजूद, पुरानी पाइपलाइनें और सीवर लाइन से पानी का मिलना समस्या को और बढ़ा रहा है। इस स्थिति में बच्चे, बुज़ुर्ग और गर्भवती महिलाओं पर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर असर पड़ने का खतरा है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक उच्च TDS वाला पानी पीने से किडनी, लीवर और पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय निवासियों की शिकायतों के मुताबिक कई सेक्टरों और सोसायटियों में समस्या लगातार बनी हुई है, और पानी की सफाई तथा पाइपलाइन सुधार की तत्काल जरूरत है। इस संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पानी की गुणवत्तापरक निगरानी और समय पर मरम्मत ही लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
