ईरान 2022 के बाद से देश में विरोध प्रदर्शनों की सबसे बड़ी लहर का सामना कर रहा है। शुरुआत में ये प्रदर्शन महंगाई और डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने के कारण शुरू हुए थे, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे तौर पर इस्लामी शासन और खामेनेई के खिलाफ सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल गया है।
देश के सभी 31 प्रांतों में लोग सड़कों पर उतर चुके हैं, और राजधानी तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर झड़पें हो रही हैं। प्रदर्शनकारी अपने नारेबाजी और आंदोलनों के माध्यम से शासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
इस बीच, ईरानी सेना ने सार्वजनिक अपील जारी करते हुए नागरिकों से कहा है कि वे दुश्मन की साजिशों को नाकाम करें और देश की शांति बनाए रखें। सेना का यह बयान दर्शाता है कि सरकार इस विरोध को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशील स्थिति में है और देश में बढ़ते अशांति के बीच सुरक्षा बल सतर्क हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक असंतुलन, महंगाई और मुद्रा संकट ने आम जनता में असंतोष को हवा दी है, जो अब राजनीतिक मांगों में बदल गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक राजनीति पर असर डाल सकते हैं।
इस समय ईरानी जनता की आवाज़ और सेना की प्रतिक्रिया दोनों ही देश की भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
