अमेरिका को मिला पहला मुस्लिम सीनेटर, अब्दुल अल-सैयद की ऐतिहासिक जीत; पत्नी का कर्नाटक के भटकल से है खास रिश्ता
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट की सीट जीत ली है। इस जीत के साथ अल-सैयद अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी बन गए हैं। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
अब्दुल अल-सैयद की जीत केवल अमेरिका तक सीमित चर्चा का विषय नहीं है। उनका भारत के कर्नाटक राज्य से भी पारिवारिक जुड़ाव है। उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू का परिवार कर्नाटक के तटीय शहर भटकल से ताल्लुक रखता है। इस वजह से उनकी जीत के बाद भारत में भी खासकर कर्नाटक के भटकल और आसपास के इलाकों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
मिशिगन में माइक रोजर्स को हराकर हासिल की जीत
मिशिगन की अमेरिकी सीनेट सीट के लिए मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के बीच था। 3 नवंबर को हुए मतदान के बाद एसोसिएटेड प्रेस ने अल-सैयद की जीत की घोषणा की।
यह सीट निवर्तमान डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स के चुनाव नहीं लड़ने के बाद खाली हुई थी। चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला रहा और राष्ट्रीय स्तर पर भी इस सीट पर नजरें टिकी हुई थीं।
ट्रंप ने प्रचार के दौरान किया था विरोध
चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल-सैयद का विरोध किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने उन्हें ‘जिहादी’ कहकर निशाना बनाया था। रिपब्लिकन खेमे के कुछ नेताओं ने भी अल-सैयद पर मुस्लिम ब्रदरहुड से कथित संबंधों को लेकर आरोप लगाए थे। अल-सैयद ने ऐसे आरोपों को खारिज किया था।
इस चुनाव में उनकी धार्मिक पहचान और राजनीतिक विचारों को लेकर भी बहस हुई। जीत के बाद अल-सैयद ने कहा कि मतदाताओं ने नफरत और विभाजन की राजनीति को स्वीकार नहीं किया।
यूनिवर्सल हेल्थकेयर और सरकारी जवाबदेही पर रहा जोर
अब्दुल अल-सैयद ने अपने चुनाव प्रचार में सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा यानी यूनिवर्सल हेल्थकेयर, आम परिवारों के खर्च कम करने और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव घटाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।
उनके एजेंडे में Medicare for All यानी सभी के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था भी शामिल रही। इसके अलावा उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही को लेकर भी अपनी बात रखी।
पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के जरिए भारत से जुड़ा है रिश्ता
अब्दुल अल-सैयद का भारत से पारिवारिक जुड़ाव उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के माध्यम से है। सारा पेशे से मनोचिकित्सक हैं और उनका परिवार कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित भटकल से जुड़ा हुआ है। भटकल, मंगलुरु से लगभग 140 किलोमीटर दूर है।
सारा के दादा जुकाकू शमसुद्दीन तत्कालीन मैसूर राज्य की सरकार में वित्त उप-मंत्री रहे थे। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती के नेतृत्व वाली सरकार में जिम्मेदारी निभाई थी। भटकल के विकास में भी उनके योगदान का उल्लेख किया जाता है।
मिशिगन यूनिवर्सिटी में हुई थी मुलाकात
अब्दुल अल-सैयद और डॉ. सारा जुकाकू की मुलाकात मिशिगन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों ने मई 2006 में शादी की। अल-सैयद ने कई मौकों पर अपनी पत्नी के दक्षिण भारतीय परिवार और संस्कृति से जुड़ाव का जिक्र किया है।
उनका यह पारिवारिक रिश्ता अब अमेरिकी राजनीति की एक ऐतिहासिक जीत के साथ भारत के कर्नाटक राज्य को भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ले आया है।
अमेरिकी सीनेट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का नया अध्याय
अब्दुल अल-सैयद की जीत अमेरिकी सीनेट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। वे इस सदन के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी हैं। उनकी जीत के साथ मिशिगन की राजनीति और अमेरिकी संसद में प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
उनका कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होगा। अब देखना होगा कि चुनाव प्रचार के दौरान स्वास्थ्य सेवा, आम लोगों की आर्थिक स्थिति और सरकारी जवाबदेही को लेकर किए गए वादों को वे सीनेट में किस तरह आगे बढ़ाते हैं।









